शिकायत निवारण समिति (GRC)

शिकायत निवारण समिति (GRC), ARCI के नियमित कर्मचारियों द्वारा उनकी सेवा संबंधी मामलों के बारे में प्रस्तुत शिकायतों और अभ्यावेदनों पर विचार करेगी।

ARCI की शिकायत निवारण समिति (GRC) के सदस्य निम्नलिखित हैं:

  • डॉ. पी. के. जैन, सह निदेशक, अध्यक्ष
  • डॉ. एल. राम कृष्ण, सह निदेशक, सह-अध्यक्ष
  • डॉ. पापिया बिस्वास, वैज्ञानिक “F”, सदस्य
  • श्री मनीष तक, वैज्ञानिक “F”, सदस्य
  • श्री एस. सुधाकरा शर्मा, वैज्ञानिक “F”, सदस्य
  • श्री ए. श्रीनिवास, वरिष्ठ प्रशासन एवं कार्मिक अधिकारी, संयोजक

सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों में शिकायतों के निपटान और अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के संबंध में निम्नलिखित दिशानिर्देश/निर्देश लागू हैं:

  1. प्रत्येक शिकायत का निपटान निष्पक्ष, वस्तुनिष्ठ और न्यायसंगत तरीके से किया जाना आवश्यक है।
  2. जन शिकायतों और कर्मचारियों की शिकायतों से संबंधित कार्य के निपटान के लिए समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए और उसका पालन किया जाना चाहिए।
  3. किसी भी शिकायत को मंत्रालय को भेजने से पहले उसका निपटान संस्थान के स्तर पर किया जाना चाहिए। संस्थान स्तर पर शिकायत समिति की नियमित बैठक आयोजित की जानी चाहिए।
  4. संगठन की वार्षिक रिपोर्ट में जन शिकायतों से संबंधित कार्य तथा उनके निवारण के लिए प्राप्त और निपटाई गई शिकायतों के आँकड़े शामिल किए जाने चाहिए।
  5. न्यायालय में विचाराधीन मामले या किसी न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय से संबंधित विषय, व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विवाद तथा सूचना का अधिकार (RTI) से संबंधित मामलों को समिति/संस्थान द्वारा निवारण के लिए नहीं लिया जा सकता है।
  6. PG पोर्टल के माध्यम से अग्रेषित शिकायतों का निपटान यथाशीघ्र किया जाना चाहिए। निपटान की अधिकतम समय-सीमा अर्थात 30 दिनों तक प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए।
  7. एक ही शिकायत को बार-बार दोहराए जाने पर अलग से विचार किया जा सकता है। उचित तथ्यों और औचित्य के आधार पर ऐसी शिकायत का निपटान किया जा सकता है और संबंधित शिकायतकर्ता को सूचित किया जा सकता है कि समान विषय-वस्तु वाली शिकायत को बार-बार प्रस्तुत करने पर संस्थान द्वारा विचार नहीं किया जा सकता। हालाँकि, PG पोर्टल पर पंजीकृत सभी शिकायतों के संबंध में इस स्थिति को अद्यतन किया जाना चाहिए।
  8. छद्म नाम से की गई, गुमनाम या झूठी शिकायतों पर CVC के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
  9. कर्मचारी का कोई भी अभ्यावेदन या शिकायत उसके तत्काल अधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी अथवा उसके कार्यालय के प्रमुख या संबंधित प्राधिकारी को संबोधित किया जाना चाहिए।
  10. निर्धारित संचार प्रक्रिया को दरकिनार करके सीधे अन्य प्राधिकारियों को अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह संस्थान के लागू आचरण नियमों के प्रावधानों के अंतर्गत आता है। इन निर्देशों/आचरण नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। इसमें ईमेल या जन शिकायत पोर्टल आदि के माध्यम से किए गए संचार सहित सभी प्रकार के संचार शामिल हैं।
  11. कर्मचारी के रिश्तेदारों द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन को भी बाहरी प्रभाव माना जाता है। यह आचरण नियमों के उस प्रावधान के अंतर्गत आता है, जो कर्मचारियों को अपने सेवा संबंधी मामलों में बाहरी प्रभाव डालने से रोकता है।
  12. DoPT द्वारा जारी अद्यतन नियमों/दिशानिर्देशों के विस्तृत संदर्भ के लिए।

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